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अविश्वसनीय ! Apollo 13 अंतरिक्ष यान ब्लास्ट होने के बाद गायब हो गए स्पेस में, फिर कैसे किया धरती पर सुरक्षित वापसी ?

क्या हुआ था Apollo 13 के लांच के पहले :

NASA ने चाँद पर मनुष्यों को भेजने के लिए Apollo मिशन की शुरुवात की ,NASA हमेशा ही अपने स्पेस मिशन पर लगतार फोकस करती है जिसके लिए वह हर साल काई अरबो डॉलर खर्च करके अंतरिक्ष यात्रियों को चांद तक भेजती है ताकी हम पृथ्वी के बहार भी चीजों को समझ सके और उन पर और अध्ययन कर सके। आने वाले समय में अगर कोई आपदा पृथ्वी पर आती है तो उसे किस तरह से संभालना है और किस तरह से हमें स्पेस का इस्तेमाल करके हमें उससे अपनी धरती को बचाना है।

Apollo 13

Apollo मिशन अमेरिका और नासा का बहुत ही जरूरी मिशन रहा है, जिसमें अपने स्पेस क्राफ्ट्स को धरती से बहार चांद पर भेजा तकी वहा पर भी कुछ खोज किया जा सके और स्पेस के कई अनसुलझे रहस्यों को सुलझा सके। इस क्रम में NASA ने अपने अपोलो 11 और 12 को तो सही सलामत तारिके से स्पेस में पाहुचा कर उतारा लेकिन अपोलो 13 के दौरे कुछ गलतियों के वजह से उसमें विस्फोट हो गया और तीन अंतरिक्ष यात्रियों की जान पर भी सवाल उठे। यह घटना है 13 अप्रैल 1970 की जब अपोलो 13 चांद पर पहुंचने वाला था लेकिन इस दुर्घटना के कारण उस मिशन को वही पर टर्मिनेट कर दिया गया था।

कहाँ हुआ ब्लास्ट :

जब यह दुर्घटना घटी तब Apollo 13 पृथ्वी से लगभाग 3 लाख किलोमीटर की दूरी पर था जब सब कुछ सही चल रहा था लेकिन तभी एक बहुत ही तेज धमाका होता है और यह मिशन बन जाता है दुनिया का सबसे खतरनाक स्पेस मिशन। इस ब्लॉग में हम उन गुत्थियों के ऊपर चर्चा करेंगे जो आज तक सभी के मन में आते रहे हैं Apollo 13 से जुड़े इस मिशन के बारे में की कैसे विश्व के सबसे अच्छे आर्गेनाइजेशन से इतनी छोटी चूक हुई की Apollo 13 में आग लग गयी और आखिर कैसे उन तीन अंतरिक्ष यात्रियों को वहां से सही सलामत वापस निकाला गया था।

इस घटना के दौरान उन् तीन अंतरिक्ष यात्रियों को किस तरह से दिक्कतों का सामना करते हुए वापस पृथ्वी पर आना पड़ा था और कैसे काफी कम समय में अपनी सूझ बूझ के साथ उस स्पेस क्राफ्ट को कम एनर्जी में वापस धरती के तरफ मोड़ना पड़ा था।

क्या है Apollo मिशन :

Apollo 11 के लांच के दौरान अमेरिका में Apollo मिशन का बहुत ही ज्यादा चर्चा था जिसमे नील आर्मस्ट्रांग और उनके साथी पहली बार चाँद पर जाकर सुरक्षित वापस आये थे। दो सफल परिक्षण के बाद अमेरिका में लोग सवाल उठाने लगे क्युकी इन मिशंस के बाद लोगो के लिए मून लैंडिंग बहुत ही आम बात होने लगी और इन मिशंस पर होने वाले खर्चे को लेकर लोगो को लगने लगा था की इन मिशंस के लिए सरकार इतना पैसा आखिर खर्च क्यों कर रही है।

लेकिन इस Apollo 13 मिशन के दौरान भी 3 एस्ट्रॉनॉट्स को ट्रेनिंग दिया गया था जिसमे कमांडर थे जिम लोवेल और वे बहुत ही ज्यादा अनुभवी NASA के साइंटिस्ट थे और उनके साथ दो और साइंटिस्ट फ्रेड हैसे और केन मत्तिंगली भी थे। लेकिन स्पेस मिशन के कुछ दिन पहले ही केन मत्तिंगली जर्मन मैसेल्स नाम के एक वायरल बीमारी के शिकार हो गए जिसके बाद जैक स्वैगर नाम के एक साइंटिस्ट को उनकी जगह पर भेजा गया था।

खैर इन सब बातों के बावजूद 11 अप्रैल 1970 को Apollo 13 को स्पेस के लिए लांच किया गया। पृथ्वी से चाँद तक जाने के लिए इन Apollo स्पेस क्राफ्ट की मदद से लगभग 4 से 5 दिन लगता है लेकिन लांच के करीब 55 घंटे बाद ही अपोलो 13 अपना आधा रास्ता कवर कर चूका था। जिसके बाद इन्होने पृथ्वी पर भेजने के लिए 55 मिनट का एक ब्रॉड कास्ट शूट किया ताकि वे इसे पृथ्वी पर भेज सके , लेकिन उसके तुरंत बाद ही उस एयरक्राफ्ट में एक बड़ा धमाका हुआ। इस धमाके को समझने के लिए हमें स्पेस क्राफ्ट के बनावट को समझना होगा।

स्पेस क्राफ्ट की बनावट :

किसी भी स्पेस क्राफ्ट के 3 हिस्से होते हैं जो लूनर मॉड्यूल, कमांड मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के नाम से जाना जाता है और इन् तीनो हिस्सों के मिलने से बनती है स्पेस क्राफ्ट। लूनर मॉड्यूल मकड़ी के तरह दिखने वाला नीचे का हिस्सा होता है जो स्पेस क्राफ्ट को चाँद पर लैंड करवाने और वापस क्राफ्ट को चाँद के ऑर्बिट से धरती के ऑर्बिट में भेजने का काम होता है और उसको लैंड होने के बाद वही चाँद पर छोड़ दिया जाता है।

कमांड मॉड्यूल स्पेस क्राफ्ट का वो हिस्सा होता है जिसमे अंतरिक्ष यात्री अपने यात्रा का सबसे अधिक समय बिताते हैं क्युकी यही वो हिस्सा होता है जिसमे बैठकर यात्री अपना सारा काम करते है और वापस धरती पर आते समय भी केवल यही हिस्सा धरती पर नीचे आता है जिसको समुन्द्र में गिराकर अंतरिक्ष यात्रियों को रेस्क्यू किया जाता है। इस हिस्से के आगे के साइड में लगी होती है वायुमण्डल के घर्षण से होने वाली गर्मी से बचने के लिए हीट शील्ड जो अंतरिक्ष यात्रियों के धरती पर वापस आने के समय उनका बचाव करता है।

जो इस क्राफ्ट का तीसरा हिस्सा होता है उसे हम कहते हैं सर्विस मॉड्यूल जो सारे जरुरी चीजों का ध्यान रखता है जैसे ऑक्सीजन, हाइड्रोजन टैंक्स जो काम आते हैं अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बिजली , पानी और हवा बनाने के लिए और इस तरह से ये मॉड्यूल बन जाता है। अंतरिक्ष यात्रियों के जरुरत का ध्यान रखने वाला जो इस क्राफ्ट का तीसरा हिस्सा होता है उसे हम कहते हैं सर्विस मॉड्यूल जो सारे जरुरी चीजों का ध्यान रखता है जैसे ऑक्सीजन, हाइड्रोजन टैंक्स जो काम आते हैं अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बिजली , पानी और हवा बनाने के लिए और इस तरह से ये मॉड्यूल बन जाता है अंतरिक्ष यात्रियों के जरुरत का ध्यान रखने वाला मॉड्यूल।

असल में क्या हुआ उस रात को :

अब हम आते हैं 55 घंटे बाद की कहानी पर जब Apollo यात्रियों ने 55 मिनट का ब्रॉडकास्ट ख़तम कर लिया और अब सब आराम करने के लिए जाने वाले रहते हैं लेकिन उससे पहले वहां की जरुरी रूटीन टास्क को ख़तम करने के बाद जिसमे कुछ जरुरी स्विच आन या ऑफ करने होते हैं और ये बताया जाता है यहाँ धरती पर मिशन कण्ट्रोल सेंटर (हॉस्टन) में बैठे सइंटिस्टों के द्वारा।

मिशन कण्ट्रोल सेंटर यहाँ यात्रियों को एक कमांड देता है ‘cryo stir’ जिसका मतलब था की आप उन पंखों को चालु कर दीजिये जो सर्विस मॉड्यूल में रखे हुए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को ठंडा होकर जमने न दे । लेकिन ये क्या आज इस बटन के दबते ही एक जोर का धमाका हुआ और किसी को भी यह नहीं पता चल पा रहा था की आखिर ये हुआ कैसे है और देखते ही देखते वहां मीटर पर दिख रही सभी सुइयां इधर उधर होने लगती हैं और सब कुछ असामान्य हो जाता है।

हॉस्टन में बैठे NASA के लोगो के पास बस एक मैसेज आता है की हमें मदद की जरुरत है और बस यहाँ हॉस्टन में बैठे लोगो के होश उड़ जाते हैं क्युकी वहाँ का डाटा कुछ अलग ही बयान कर रहा था जिसमे सबसे ज्यादा डरावना डाटा था ऑक्सीजन टैंक के खाली होने का और जो दूसरा टैंक था वो भी काफी तेजी से खाली होता जा रहा था। थोड़े देर बाद जब जिम लोवेल ने खिड़की से बहार देखा तो उन्हें बाहर कोई गैस लीक होते दिखाई दे रही थी ।

जिसके बाद ही उन्होंने हॉस्टन को इन्फॉर्म किया की हमारे स्पेस क्राफ्ट के बाहर कोई गैस लीक हो रही है, फिर यह कन्फर्म हुआ की वह कोई और गैस नहीं बल्कि ऑक्सीजन गैस ही थी जो ब्लास्ट के बाद शायद अपने टैंक से लीक कर रही थी।

कैसे लाया गया स्पेस क्राफ्ट को वापस धरती पर :

बाद में हुए रिसर्च के बाद ये पता चला की स्विच दबाने के बाद ही एक स्पार्क हुआ जिसके वजह से वहां मौजूद ऑक्सीजन के वजह से आग लग गयी और एक ऑक्सीजन सिलिंडर में आग लग गयी और ब्लास्ट हो गया , इस ब्लास्ट की वजह से दुसरे टैंक में एक छेद हो गया जिससे ऑक्सीजन गैस लीक हो रही थी और जिम लोवेल को बाहर दिख रही थी।

अब जब कोई रास्ता और काम भर की ऑक्सीजन और बिजली नहीं बची थी तब NASA की टीम ने सोचा की अब लूनर फ्री return ट्राजेक्टोरी को इस्तेमाल करके स्पेस क्राफ्ट को चाँद पर बिना लैंड कराये धरती के तरफ वापस मोड़ लेना चाहिए और इसके लिए चाँद के ऑर्बिट का इस्तेमाल करके ही काम बन सकता था क्युकी इंजन चालु करने के लिए उस स्पेस क्राफ्ट में एनर्जी नहीं बची थी और कुछ एनर्जी बचाना भी था अभी धरती के वायु मंडल में प्रवेश करने के लिए।

अब जो सबसे जरुरी काम बचा था वो था वो था गाइडेंस सिस्टम और कार्बन डाइऑक्साइड फ़िल्टर को कमांड मॉड्यूल में लाना था क्युकी 3 लोगो के होने के वजह से वहां का अकेला फ़िल्टर काम नहीं कर पा रहा था और गाइडेंस सिस्टम तो सबसे ज्यादा जरुरी चीज थी क्युकी गाइडेंस सिस्टम स्पेस का मैप होता है जो स्पेस क्राफ्ट को उस जगह पर जाने के लिए दिशा देता है। इन दोनों चीजों के ट्रांसफर होने के बाद थोड़ा एनर्जी बचाना था ताकि re -entry के दौरान उस एनर्जी का इस्तेमाल किया जा सके धरती के अंदर प्रवेश करने में ।

क्या परेशानियां आयी थीं :

अब सबसे बड़ी परेशानी थी बिना सर्विस मॉड्यूल के धरती के अंदर प्रवेश करना क्युकी धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते समय स्पेस क्राफ्ट के कमांड मॉड्यूल को एक खास तरह के एंगल पर रखना होता है नहीं तो Apollo स्पेस क्राफ्ट ब्लास्ट भी हो सकता है या फिर बाउंस बैक भी कर सकता है।

किसी तरह हॉस्टन में बैठे साइंटिस्ट जोड़ घटाना करने के बाद उनको मैन्युअली एंगल सही करने के लिए कहते हैं और रिफरेन्स में सूरज और धरती को लिया गया था , लेकिन तब तक स्पेस क्राफ्ट का नीचे से संपर्क टूट जाता है क्युकी Apollo स्पेस क्राफ्ट की बिजली भी ख़तम हो चुकी थी , थोड़े देर बाद ही उस स्पेस क्राफ्ट को पसिफ़िक ओसियन में एक तय जगह गिरना था इसलिए अब सबकी निगाहें आसमान में ही थी।

लेकिन थोड़े देर बाद ही पैराशूट के साथ सबको आसमान में कुछ नजर आता है और सब खुश हो जाते है। थोड़े ही देर में उस जगह से उस Apollo स्पेस क्राफ्ट को रेस्क्यू किया जाता है और फिर तीनो एस्ट्रॉनॉट्स को सही सलामत निकल लिया जाता है।

इतने उतार चढाव और परेशानियों के बीच भी इस मिशन में स्पेस में गायब हुए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को बचा लिया गया इस लिए इस Apollo मिशन को लोग सफल विफलता (successful failure) कहते हैं, क्युकी यह स्पेस क्राफ्ट चाँद पर जाने के लिए निकला लेकिन स्पेस में ही इसमें ब्लास्ट हो गया और ये लोग स्पेस में गायब हो गए लेकिन फिर भी इनको ढून्ढ कर सही सलामत धरती पर वापस लाना अपने आप में एक सक्सेस रहा।

क्यों हुआ था ब्लास्ट ?

बाद में बहुत सारे जांच बैठाये गए और पता ये चला की स्पेस क्राफ्ट के लांच के पहले इसमें कई सारे बदलाव किये गए थे जिसमे जितने भी 28 वाट के पार्ट्स थे उन्हें 65 वाट में कन्वर्ट किया गया था लेकिन ऑक्सीजन सिलिंडर में मौजूद एक पार्ट को बदलना रह गया था जिसके वजह से जो पार्ट 28 वाट झेलने के लिए बना था उस पार्ट को 65 वाट मिल रहा था और वो गरम होने के बाद पिघल गया था ।

और जैसे ही cryo stir का बटन दबा वैसे ही एक स्पार्क हुआ जो ऑक्सीजन के संपर्क में आया और क्राफ्ट में ब्लास्ट हुआ। जब धरती के नजदीक आने पर इन दोनों मॉडल को स्पेस में छोड़ा गया तब इनकी फोटो ली गयी जिसमे सर्विस मॉड्यूल का एक साइड पूरी तरह से ब्लास्ट में ख़तम हो चूका जिसकी फोटो यहाँ नीचे लगी हुई है।

इस तरह के मिशन में वो भी स्पेस में ही अगर स्पेस क्राफ्ट में ब्लास्ट हो जाता है तो लोग उसका बचना लगभग असंभव समझते है वो भी तब जब आप धरती से 3 लाख 20 हजार किलो मीटर दूर जा चुके हों। इस मिशन के शुरू होने के पहले ही इसमें कुछ गलतियां हुई थी जिनकी वजह से ये हादसा हुआ था लेकिन अब NASA अपने इस्तेमाल की जाने वाली सभी स्पेस क्राफ्ट्स का सही तरीके से जांच करती है और स्पेस में भेजने से पहले कई तरह की टेस्टिंग करती है। लेकिन यह हादसा विश्व में पहली बार था और यह बहुत ही बड़े कहानी के रूप में उभर कर आयी।

नीता अंबानी के बारे में पढ़ें

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